सार:
साइबर फ्रॉड की घटना के बाद पहले 60 मिनट बहुत ज़रूरी होते हैं। इसे ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है। अगर आप इस दौरान 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करते हैं या Cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करते हैं, तो आपका बैंक अकाउंट फ्रीज़ किया जा सकता है, और बाकी की ट्रांसक्शन चैन को ट्रैक किया जा सकता है जिससे चोरी हुए पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। सावधानी और समय पर रिपोर्ट करना ही आपका सबसे अच्छा बचाव है।

golden-hour
नई दिल्ली: भारत में साइबर फ्रॉड अब किसी खास क्लास या उम्र के ग्रुप तक सीमित नहीं रहा है। मोबाइल फोन, इंटरनेट बैंकिंग और UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ, धोखेबाजों ने भी अपने तरीके बदल लिए हैं। चाहे वह OTP और KYC अपडेट के लिए रिक्वेस्ट हो, डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी हो, या बैंक अधिकारियों का रूप धारण करना हो, लोगों की बचत मिनटों में खत्म हो रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है: अगर आप फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं तो क्या पैसे वापस मिल सकते हैं? इसका जवाब है हां, लेकिन एक शर्त के साथ। वह शर्त है “गोल्डन आवर,” यानी पहले 60 मिनट।
साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि साइबर फ्रॉड के बाद पहला घंटा सबसे ज़रूरी होता है। इस दौरान की गई शिकायत से बैंकिंग सिस्टम में अलर्ट जारी हो सकता है, जिससे ट्रांजैक्शन रुक सकता है, और कई मामलों में चोरी हुए पैसे को रोका जा सकता है या वापस भी किया जा सकता है। सरकार ने इसके लिए 1930 हेल्पलाइन और Cybercrime.gov.in पोर्टल दिया है। हालांकि, जागरूकता की कमी के कारण, ज़्यादातर लोग घटना की रिपोर्ट करने में देरी करते हैं, और नुकसान पक्का हो जाता है।
साइबर फ्रॉड के तरीके कैसे बदल रहे हैं?
साइबर एक्सपर्ट मोहित यादव बताते हैं कि जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे धोखेबाज़ भी ज़्यादा चालाक होते जा रहे हैं। अब स्कैम सिर्फ़ फ़ोन कॉल तक ही सीमित नहीं हैं। अब लोगों को फ़ेक APK फ़ाइलों, अनजान लिंक, WhatsApp इनविटेशन कार्ड, बिजली या गैस बिल, ट्रैफ़िक फ़ाइन और फ़ेक बैंक अलर्ट के ज़रिए फंसाया जा रहा है। किसी का बैंक अकाउंट खाली करने के लिए बस एक क्लिक या एक परमिशन ही काफ़ी है।

इसलिए, साइबर फ्रॉड से बचने के लिए सबसे बेहतरीन तरीका यही होगा कि हम लोग किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और कोई आपातकालीन स्थिति को बताने तक के लिए यदि किसी अनजान व्यक्ति का फ़ोन तक आता है तो उस स्थिति की पुनः जाँच अवश्य कर लें की वो सच है भी या नहीं। कहने का तात्पर्य यह है कि किसी भी स्थिति में अपना विवेक ना खोएं और हमेशा सूझ-बूझ से काम लें। क्योंकि साइबर ठग आपकी जल्दबाज़ी, लालच, अविवेकी, और आतुरता का ही फायदा उठाना चाह कर आपको ठगना चाहतें हैं।
क्या है साइबर फ्रॉड का ‘गोल्डन ऑवर’?
“गोल्डन आवर” का मतलब है, फ्रॉड की रिपोर्ट होने के बाद पहले 60 मिनट, जो बहुत ज़रूरी होते हैं। इस दौरान बैंक और एजेंसियां तेज़ी से कार्रवाई कर सकती हैं। इस समय में, ट्रांज़ैक्शन चेन को ट्रैक किया जा सकता है, पैसे पाने वाले का अकाउंट फ्रीज़ किया जा सकता है, और फंड को आगे ट्रांसफर होने से रोका जा सकता है। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज की जाएगी, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही ज़्यादा होगी।
फ्रॉड होते ही क्या करें?
अगर आप साइबर फ्रॉड के शिकार हो जाते हैं, तो घबराएं नहीं; इसके बजाय, तुरंत ये कदम उठाएं:
- तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें।
- gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
- अपने बैंक को तुरंत सूचित करें।
- ट्रांज़ैक्शन आईडी (Transaction ID) और कॉल/ मैसेज के स्क्रीनशॉट सेव करें।
कई मामलों में समय पर शिकायत दर्ज करना बहुत फायदेमंद हो सकता है।
कैसे बचें साइबर ठगी से?
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट मोहित यादव के कई सैलून के तजुर्बे के चलते, वो कहतें हैं कि:
- सावधानी ही सबसे अच्छा बचाव है।
- किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
- अपना OTP, बैंक डिटेल्स या KYC जैसी अत्यधिक गोपनीय जानकारी किसी के साथ शेयर न करें।
- अपने मोबाइल डिवाइस पर ऐप परमिशन और लोकेशन एक्सेस देने से पहले ध्यान से सोच लें।
- अगर आपको कोई शक हो, तो तुरंत कॉल काट दें।
- APK फ़ाइलें डाउनलोड करने से बचें।
इसलिए अलावा कई ऐसी चीज़ें हैं जो कि किसी को भी सिखाई नहीं जा सकतीं हैं क्योंकि कल को साइबर ठग आपको ठगने के लिए क्या नया पैतरा लेकर आ जाये, कहा नहीं जा सकता है। ऐसे में आपको चाहिए कि किसी भी स्थिति में अपना विवेक न खोये और सदैव अपनी बुद्धि का प्रयोग करते हुए ही फ़ोन, मैसेज, या कॉल पर कोई भी गतिविधि करें क्योंकि किसी भी चिर-परिचित आवाज़ या चेहरे में भी डीपफेक जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता हुआ साइबर ठग ही आपसे बात करता हुआ पाया जा सकता है।
त्योहार और शादी के सीजन में ज्यादा खतरा
ऐसा बीते कुछ सालों में देखा गया है कि नए साल और शादी-ब्याह के मौसम में साइबर फ्रॉड के मामले हर साल तेज़ी से बढ़ते हैं। इस दौरान इनविटेशन कार्ड, गिफ्ट कूपन और बिल के नाम पर फेक फाइलें खूब भेजी जाती हैं। थोड़ी सी लापरवाही से बड़ा नुकसान हो सकता है जिसकी भरपाई कर पाना हर इंसान के लिए मुमकिन नहीं होता। साइबर ठग असहनीय आर्थिक और मानसिक पीड़ा अपने शिकारों को पहुँचा जातें हैं, जिससे निकलने के लिए कई व्यक्तियों को सालों लग जातें हैं जिससे प्रभावित होकर कई व्यक्ति तो ख़ुदकुशी जैसी शर्मनाक हरकत तक कर लेतें हैं।
साइबर फ्रॉड आज की डिजिटल दुनिया की सच्चाई है, लेकिन सही जानकारी और समय पर कार्रवाई से नुकसान से बचा जा सकता है। याद रखें, “60 मिनट का गोल्डन आवर” आपकी मेहनत की कमाई बचा सकता है, यदि ऐसी नौबत आ ही जाये तो।
Leave a Reply